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post authorAdmin 24 Jan 2026

ऋषिकेश में मानवता की मिसाल: ब्रेन डेड रघु ने जाते-जाते पांच लोगों को दिया जीवनदान.

मृत्यु अंत नहीं होती, कभी-कभी वह कई जिंदगियों की शुरुआत बन जाती है।
ऋषिकेश के 42 वर्षीय रघु पासवान ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में यह साबित कर दिया कि अंगदान वास्तव में महादान है।

बिहार के मूल निवासी और पेशे से राजमिस्त्री रघु पासवान हाल ही में एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हालत बिगड़ने पर उन्हें AIIMS ऋषिकेश में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान वह नॉन-रिवर्सिबल कोमा में चले गए। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों और जांचों के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया।

न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश अरोड़ा के अनुसार, मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत परिजनों को स्थिति की जानकारी दी गई और अंगदान के विकल्प पर चर्चा की गई। परिजनों की सहमति के बाद कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया शुरू की गई।

इस ऐतिहासिक निर्णय से रघु पासवान ने पांच गंभीर रोगियों को नया जीवन दिया, जबकि उनकी आंखों से दो दृष्टिहीनों को फिर से रोशनी मिलने जा रही है।

प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारत भूषण भारद्वाज ने बताया कि—

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ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 9 जिलों की पुलिस का सहयोग लिया गया ताकि अंगों को समय रहते गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।

एम्स ऋषिकेश में यह कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन का दूसरा सफल मामला है।
कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इसे मानवता के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और समाज से अंगदान के प्रति जागरूक होने की अपील की।