kotha
post authorAdmin 24 Jan 2026

क्यों चल रही है देशभर में मतदाता सूची की खास पड़ताल? SIR के नाम पर क्या है सच और क्यों बढ़ रहा है भरोसे का संकट.

देश में मतदाता सूची को लेकर अब तक की सबसे सख्त और व्यापक जांच प्रक्रिया चल रही है। इसे विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी SIR (Special Intensive Revision) कहा जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 3.69 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।

सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए।
Election Commission of India का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के लिए उठाया गया है।

हालांकि, नागरिक संगठनों और विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भरोसे की परीक्षा बनती जा रही है।

SIR के तहत मृत मतदाताओं के नाम हटाना, डुप्लीकेट प्रविष्टियां समाप्त करना, स्थान बदल चुके मतदाताओं का सत्यापन और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना शामिल है।
यह प्रक्रिया सामान्य वार्षिक पुनरीक्षण से कहीं अधिक सख्त है, जिसमें डोर-टू-डोर सत्यापन, दस्तावेज़ जांच और स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट तैयार की जाती है।

विवाद की जड़ दस्तावेज़ों की सख्ती और सूचना के अभाव में छिपी है। कई जिलों में जन्म प्रमाण पत्र, पुराने पते के सबूत और पारिवारिक दस्तावेज़ मांगे गए, जिससे गरीब, प्रवासी और किराएदार मतदाताओं में डर और भ्रम बढ़ा।

हालांकि आयोग बार-बार स्पष्ट कर रहा है कि SIR का नागरिकता निर्धारण से कोई संबंध नहीं है, लेकिन असम के NRC अनुभव के कारण जनता के एक वर्ग में आशंका बनी हुई है।