ऋषिकेश (उत्तराखंड):
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज भरत मंदिर, ऋषिकेश में आयोजित वसंतोत्सव-2026 (मैथिली ठाकुर नाइट) में सम्मिलित हुए। पतित-पावनी मां गंगा के पावन तट पर आयोजित इस भक्तिमय संध्या में साधु-संतों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों और देश-प्रदेश से आए श्रद्धालुओं की बड़ी सहभागिता रही।
मुख्यमंत्री ने गंगा माता के चरणों में नमन करते हुए कहा कि मधुबनी की शान और लोक-भक्ति संगीत की स्वर-साधिका मैथिली ठाकुर का योगनगरी ऋषिकेश आगमन सौभाग्य का विषय है। उन्होंने आयोजन समिति—ऋषिकेश बसंतोत्सव समिति—को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई दी और इसे संस्कृति-संगीत के अनुपम संगम का उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश आधुनिक योग-अध्यात्म का केंद्र होने के साथ सनातन संस्कृति की प्राचीन पुण्यभूमि है। सतयुग में महर्षि रैभ्य, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम की तपस्या और भरत जी द्वारा भगवान नारायण की स्थापना से लेकर आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा तक—यह भूमि आध्यात्मिक चेतना की साक्षी रही है।
उन्होंने मैथिली ठाकुर की साधना, परिश्रम और सेवा-भाव की सराहना करते हुए कहा कि कला-संस्कृति मंच से आगे बढ़कर समाज-सेवा और राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा बनती है। लोक संगीत को जन-जन तक पहुँचाने में उनका योगदान उल्लेखनीय है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें ‘नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड—कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीत-संगीत के माध्यम से की गई उपासना ईश्वर से संवाद का मार्ग है। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की ध्वजा विश्व में गौरव से फहरा रही है। अयोध्या श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ-केदारनाथ पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे कार्यों से भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। इसी प्रेरणा से उत्तराखंड में केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और यमुना तीर्थ पुनरुद्धार जैसी परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।
उन्होंने कहा कि दून विश्वविद्यालय में “सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज” की स्थापना तथा गढ़वाल-कुमाऊँ में स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की योजना संस्कृति-अध्ययन और आध्यात्मिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगी। सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है—जिसका प्रमाण सख्त धर्मांतरण, दंगा-रोधी, नकल-विरोधी कानून, भू-कानून, यूसीसी और भ्रष्टाचार-विरोधी कठोर कार्रवाइयाँ हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनसमर्थन से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का “विकल्प-रहित संकल्प” अवश्य पूरा होगा।



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