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post authorAdmin 26 Jan 2026

‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम’ : कर्तव्य पथ पर गुजरात की झांकी ने दिखाई तिरंगे के निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा.

‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है — जो स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वतंत्रता का उद्घोष करता है। ‘वंदे मातरम’ गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ पर गुजरात की झांकी ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की ऐतिहासिक निर्माण यात्रा को भव्य और भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया।

झांकी की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ शब्द की पृष्ठभूमि से होती है, जहां स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों के साथ तिरंगे के बदलते स्वरूप को जीवंत दृश्यात्मक प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया गया। इसमें नवसारी, गुजरात में जन्मी वीरांगना मैडम भीकाजी कामा द्वारा 1907 में पेरिस में फहराए गए ‘वंदे मातरम’ लिखे ध्वज की गौरवगाथा को विशेष रूप से दर्शाया गया।

झांकी के मध्य भाग में 1906 से 1947 तक राष्ट्रीय ध्वज की विकास यात्रा दिखाई गई — कोलकाता के पारसी बागान से लेकर पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किए गए ध्वज और अंततः संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए वर्तमान तिरंगे तक। स्वतंत्रता आंदोलन के हर पड़ाव को इस झांकी में ऐतिहासिक सटीकता और भावनात्मक प्रभाव के साथ प्रस्तुत किया गया।

अंतिम हिस्से में महात्मा गांधी के चरखे के माध्यम से स्वदेशी आंदोलन और विशाल धर्मचक्र के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना का समन्वय दिखाया गया। कलाकारों ने गुजराती साहित्यकार झवेरचंद मेघाणी के गीत ‘कसुंबी नो रंग’ की धुन पर प्रस्तुति देकर झांकी को जीवंत बना दिया।