उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में वर्ष 2011 के सड़क हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के जवान के परिवार को दिए गए करीब 29 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा है।
उत्तराखंड हाई कोर्ट की सिंगल बेंच, जिसमें जस्टिस पंकज पुरोहित शामिल थे, ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
दरअसल, पिथौरागढ़ मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने पहले ही मृतक जवान के परिजनों को ब्याज सहित 28.91 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए परिवहन निगम ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अब निरस्त कर दिया गया है।
हादसा कैसे हुआ?
साल 2011 में भारतीय सेना की 5वीं गार्ड्स रेजिमेंट के नायक गणेश सिंह बरेली से टनकपुर जा रहे थे। यात्रा के दौरान UPSRTC की बस सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई। हादसे में गणेश सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह दुर्घटना बस चालक की लापरवाही के कारण हुई। निगम की ओर से यह दलील दी गई कि साइकिल सवार को बचाने के प्रयास में हादसा हुआ और ट्रक गलत तरीके से खड़ा था।
लेकिन अदालत ने पाया कि:
बस चालक को गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया।
निगम अपनी दलील के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
इसी आधार पर अदालत ने परिवहन निगम की अपील खारिज कर दी और मुआवजा आदेश को बरकरार रखा।



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