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post authorAdmin 13 Feb 2026

रुद्रप्रयाग: न बोल पाए, न सुन पाए; दो बैलों के सहारे ज़िंदगी, अभावों के पहाड़ तले दबे नरेंद्र की दर्दभरी कहानी.

रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड।
रुद्रप्रयाग जनपद की बच्छणस्यूं पट्टी के क्वल्ली गांव में रहने वाले बुजुर्ग नरेंद्र सिंह पंवार की कहानी सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

नरेंद्र बोलने और सुनने में असमर्थ हैं। परिवार और संपत्ति के नाम पर उनके पास केवल दो जोड़ी बैल हैं, जिनके सहारे वे अपना जीवन गुजार रहे हैं।

सरकारी नीतियों का उद्देश्य जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाना है, लेकिन नरेंद्र वर्षों से योजनाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें न तो विकलांग पेंशन मिल रही है और न ही अंत्योदय योजना का लाभ।

बताया जाता है कि उनके पास पहले राशन कार्ड था, जिससे सरकारी सस्ते गल्ले से राशन मिलता था, लेकिन कार्ड गुम हो जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। आधार कार्ड भी नहीं होने के कारण सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करना संभव नहीं हो पा रहा है।

गांव के बुजुर्ग रघुवीर सिंह रावत का कहना है कि वे नरेंद्र को सरकारी दफ्तरों तक ले गए, लेकिन अब तक कोई लाभ नहीं मिला। ग्राम प्रधान ममता देवी बताती हैं कि ग्रामीणों की मदद से ही उनकी आजीविका चल रही है।

उत्तराखंड क्रांति दल के नेता अर्जुन कंडारी ने मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से तत्काल मदद की मांग की है।

वहीं, सीडीओ राजेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मामला संज्ञान में है और जांच कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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