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post authorAdmin 18 Feb 2026

उत्तराखंड के 131 गांव और तीन धाम कस्बों में सितंबर 2026 से डिजिटल जनगणना, पहली बार ‘स्व-गणना’ सुविधा.

देहरादून। देशव्यापी जनगणना की अधिसूचना जारी होने के बाद उत्तराखंड में तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगी। विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के 131 हिमाच्छादित गांवों तथा तीन प्रमुख तीर्थ कस्बों—बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री—में जनगणना कार्य सितंबर 2026 में ही संपन्न किया जाएगा।

यह जानकारी राज्य की जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने एक विशेष बातचीत में दी।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना प्रक्रिया दो चरणों में आयोजित की जाएगी—

  1. मकान सूचीकरण (House Listing)

  2. जनसंख्या गणना (Population Enumeration)

राज्य स्तरीय इंपावर्ड कमेटी ने मकान सूचीकरण 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रस्तावित किया है, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अंतिम स्वीकृति मिलनी शेष है।

प्रदेश को लगभग 30,000 गणना क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में एक प्रगणक तैनात होगा तथा छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर नियुक्त रहेगा।

प्रशासनिक सीमाएं 2027 तक स्थिर

31 दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार जो गांव, वार्ड या जिला है, उसकी सीमा मार्च 2027 तक अपरिवर्तित रहेगी। जनगणना अवधि के दौरान अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले नहीं किए जाएंगे।

पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना

सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण

प्रगति रिपोर्ट लाइव ट्रैकिंग

मोबाइल ऐप से डेटा एंट्री

स्व-गणना (Self Enumeration) सुविधा

नागरिक स्वयं पोर्टल पर पंजीकरण कर अपने मोबाइल से जनगणना फॉर्म भर सकेंगे। उन्हें एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के सत्यापन के समय प्रस्तुत करना होगा।

दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच

जनगणना कार्य स्थानीय शिक्षकों द्वारा किया जाएगा, जिन्हें तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार विशेष प्रबंध कर सकती है।

घोस्ट विलेज’ भी होंगे शामिल

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में 16,793 राजस्व ग्राम थे, जिनमें से 1,048 निर्जन थे। फरवरी 2027 के दौरान सभी गांवों का सत्यापन किया जाएगा—चाहे वहां आबादी हो या नहीं।