उत्तराखंड में सरकारी विभागों की टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। महालेखाकार (ऑडिट) की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आया है कि ई-टेंडरिंग व्यवस्था को दरकिनार कर डमी ठेकेदारों के जरिए ठेके बांटे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, बड़े निर्माण कार्यों को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के ई-टेंडर पोर्टल पर जारी कई निविदाओं में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर खामियां पाई गईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई निविदादाता बार-बार टेंडर प्रक्रिया में शामिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें कभी ठेका नहीं मिलता। महालेखाकार ने ऐसे निविदादाताओं को डमी ठेकेदार मानते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की है।
ऑडिट में यह भी सामने आया कि कई मामलों में उच्च दरों पर दूसरे स्थान पर रहने वाले निविदादाता को ठेका दे दिया गया, जबकि सबसे कम बोली लगाने वाले को तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया। ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम में दस्तावेजों की जांच और निविदा स्वीकार-अस्वीकार की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
रिपोर्ट मिलने के बाद वित्त विभाग के अपर सचिव गंगा प्रसाद ने सभी विभागों को पत्र जारी कर उत्तराखंड प्रोक्योरमेंट नियमावली का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ई-टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है।



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