इस्लामाबाद | 11 फरवरी 2026
ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में एक बड़ा और बेबाक बयान देते हुए स्वीकार किया कि अतीत में अमेरिका के साथ किया गया रणनीतिक गठजोड़ देश के लिए “गंभीर भूल” साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से अफगान युद्धों के दौरान लिए गए फैसलों ने पाकिस्तान को दीर्घकालिक अस्थिरता, आतंकवाद और आर्थिक संकट की स्थिति में ला खड़ा किया।
रक्षा मंत्री ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—“अमेरिका ने अपने रणनीतिक हित पूरे होने तक पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और बाद में उसे छोड़ दिया। हमारे साथ टॉयलेट पेपर से भी बदतर व्यवहार किया गया।”
मिलिटेंसी पर स्वीकारोक्ति
आसिफ ने माना कि पाकिस्तान लंबे समय तक उग्रवाद को समर्थन देने की भूमिका से इनकार करता रहा, लेकिन इस नीति ने देश को गहरा नुकसान पहुंचाया।
उनके अनुसार, आज पाकिस्तान में आतंकवाद की जो स्थिति है, वह पूर्व सैन्य शासकों की नीतियों का परिणाम है।
दो अफगान युद्धों में शामिल होना ‘रणनीतिक भूल’
रक्षा मंत्री ने कहा कि 9/11 हमलों के बाद अमेरिका का साथ देना और तालिबान के खिलाफ मोर्चा लेना पाकिस्तान की बड़ी रणनीतिक गलती थी।
जब अमेरिका अफगानिस्तान से वापस चला गया, तब पाकिस्तान को हिंसा, कट्टरपंथ और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
पूर्व सैन्य शासकों पर आरोप
आसिफ ने पूर्व सैन्य शासकों जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने राष्ट्रीय हितों के बजाय एक महाशक्ति को खुश करने के लिए फैसले लिए।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि उस दौर में शिक्षा प्रणाली में वैचारिक बदलाव किए गए, जिनके प्रभाव आज भी पाकिस्तान झेल रहा है।



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