ऋषिकेश: तीर्थनगरी ऋषिकेश में वनभूमि को लेकर चल रहा विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस विवाद से प्रभावित परिवार एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर एकजुट नजर आए। उनका साफ कहना है कि जिस क्षेत्र में वे रह रहे हैं, उसे राजस्व क्षेत्र घोषित किया जाए ताकि उन्हें कानूनी मान्यता मिल सके और बेदखली का खतरा खत्म हो।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। यहां उनके पक्के मकान, बिजली-पानी के कनेक्शन और अन्य मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और सामाजिक जीवन पूरी तरह इसी इलाके से जुड़ा हुआ है। परिवारों का आरोप है कि उन्हें अचानक वनभूमि पर अतिक्रमणकर्ता बताकर हटाने की कार्रवाई की जा रही है, जो उनके साथ अन्याय है।
इस मामले की जानकारी मिलने पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी मौके पर पहुंचे और प्रभावित लोगों से सीधे बातचीत की। उन्होंने परिवारों की समस्याएं सुनीं और कहा कि वर्षों से बसे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ना अमानवीय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले का समाधान मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण से किया जाए।
यशपाल आर्य ने कहा कि वन संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बेघर करना सही नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को सरकार और सदन में मजबूती से उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहेंगे।
प्रभावित परिवारों ने भी स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि वे न तो नए अतिक्रमणकर्ता हैं और न ही किसी नियम का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि लंबे समय से बसे हुए नागरिक हैं जिन्हें अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही जा रही है। हालांकि, जब तक राजस्व क्षेत्र घोषित करने या वैकल्पिक पुनर्वास पर स्पष्ट फैसला नहीं आता, तब तक यह वनभूमि विवाद शांत होता नजर नहीं आ रहा है।



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