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post authorAdmin 01 Mar 2026

जंतर-मंतर पर शिया मुस्लिम समुदाय का बड़ा विरोध प्रदर्शन, आयातोल्लाह खामेनेई की मौत पर शोक और आक्रोश.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिया मुस्लिम समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद आयोजित किया गया, जिसे लेकर समुदाय में गहरा शोक और आक्रोश देखा गया। प्रदर्शन में दिल्ली सहित आसपास के राज्यों से आए सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनमें पुरुषों के साथ महिलाएं और युवा भी मौजूद थे।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर, पोस्टर और झंडे लेकर नारेबाज़ी की और खामेनेई को शिया समुदाय का एक प्रभावशाली धार्मिक और वैचारिक नेता बताया। लोगों ने कहा कि उनकी मौत केवल ईरान तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी शिया दुनिया पर पड़ा है। प्रदर्शन के दौरान शोक स्वरूप मातम किया गया और धार्मिक नारे लगाए गए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक शक्तियों के टकराव ने मध्य-पूर्व को लंबे समय से अस्थिर बना रखा है और खामेनेई की मौत उसी तनाव का नतीजा है। उन्होंने इस घटना को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग की। कई वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक नेतृत्व को निशाना बनाना न केवल राजनीतिक बल्कि मानवीय मूल्यों के भी खिलाफ है।
जंतर-मंतर पर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए थे और पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन स्थल के आसपास ट्रैफिक को नियंत्रित किया गया ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से लगातार संवाद बनाए रखा और कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न कराया।
प्रदर्शन के अंत में शिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने सरकार से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास करे। उन्होंने यह भी कहा कि शिया मुस्लिम समुदाय भारत में शांति और कानून-व्यवस्था में विश्वास रखता है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी भावनाएं और मांगें सामने रखता रहेगा।
इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आयातोल्लाह खामेनेई की मौत की खबर ने भारत में भी शिया समुदाय को गहराई से प्रभावित किया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाएं तेज़ हो सकती हैं।