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post authorAdmin 03 Mar 2026

संघर्ष से सफलता तक: देवप्रयाग की तीन बेटियों की कहानी, एक एयरफोर्स में तो दो इवेंट इंडस्ट्री में अव्वल.

देवप्रयाग की तीन बेटियों ने अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर ऐसी मिसाल कायम की है, जो न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर इन तीनों बहनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान के लिए संसाधनों से ज्यादा हौसले जरूरी होते हैं।

देवप्रयाग के एक साधारण परिवार में जन्मीं इन तीन बहनों की परवरिश सीमित संसाधनों के बीच हुई। पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। परिवार ने भी बेटियों की शिक्षा और सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग दिया, जिसका नतीजा आज पूरे क्षेत्र के सामने एक प्रेरक उदाहरण के रूप में है।

तीनों में से एक बेटी ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और वर्षों की तैयारी के बाद भारतीय वायुसेना में अधिकारी बनकर देशसेवा का मार्ग चुना। कठिन चयन प्रक्रिया, शारीरिक और मानसिक परीक्षा को पार कर वायुसेना में स्थान पाना आसान नहीं था, लेकिन उसने अपने जज़्बे से यह मुकाम हासिल किया। आज वह न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे देवप्रयाग क्षेत्र का गौरव बनी हुई है।

वहीं दूसरी और तीसरी बेटी ने रचनात्मक क्षेत्र को अपना कर इवेंट इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में कदम रखा और धीरे-धीरे अपने हुनर, प्रबंधन क्षमता और मेहनत के दम पर बड़े आयोजनों से जुड़ती चली गईं। आज वे सफलतापूर्वक कॉर्पोरेट इवेंट्स, सामाजिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रबंधन कर रही हैं।

इन तीनों बहनों की सफलता ने यह संदेश दिया है कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। चाहे वह देश की रक्षा हो या आधुनिक उद्योगों में करियर बनाना, देवप्रयाग की इन बेटियों ने साबित किया है कि दृढ़ निश्चय और मेहनत से हर सपना साकार किया जा सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बेटियों की उपलब्धि से क्षेत्र की अन्य लड़कियों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिली है। आज देवप्रयाग की गलियों में इन तीन बहनों की सफलता की चर्चा है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुकी है।