देहरादून।
क्लेमनटाउन क्षेत्र में कर्नल की बुजुर्ग विधवा की कोठी गिराने और कथित लूटपाट के मामले में राज्य पुलिस प्राधिकरण ने बड़ा फैसला सुनाया है। जांच में देहरादून के तत्कालीन एसएसपी (अब डीआईजी) जनमेजय खंडूड़ी और तत्कालीन थाना प्रभारी नरेंद्र गहलावत को कार्रवाई न करने का दोषी पाया गया है।
राज्य पुलिस प्राधिकरण ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करते हुए मामले में हुई हीलाहवाली और लीपापोती को गंभीर माना है।
यह मामला वर्ष 2022 का है, जब क्लेमनटाउन क्षेत्र में रहने वाली कर्नल विनोद कुमार कपूर की विधवा कुसुम कपूर (69) ने आरोप लगाया था कि उनके घर पर हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया और जेसीबी मशीन से उनकी कोठी को ध्वस्त कर दिया।
पुलिस पर मदद न करने का आरोप
कुसुम कपूर के अनुसार, उस समय वह नोएडा गई हुई थीं और घर पर उनकी मानसिक रूप से दिव्यांग 40 वर्षीय बेटी टीना कपूर मौजूद थी। आरोप है कि 12 जनवरी 2022 को अमित यादव नामक व्यक्ति हथियारबंद लोगों और जेसीबी मशीन के साथ घर पहुंचा और मकान को गिराना शुरू कर दिया।
कुसुम कपूर ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन उसने कार्रवाई करने के बजाय कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
कई पुलिस अधिकारियों पर लगाए थे आरोप
कुसुम कपूर ने राज्य पुलिस प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराते हुए कई पुलिस अधिकारियों को आरोपी बनाया था, जिनमें शामिल थे:
तत्कालीन एसएसपी जनमेजय खंडूड़ी
एसपी विशाखा अशोक भदाणे
तत्कालीन सीओ सदर नरेंद्र पंत
थाना प्रभारी नरेंद्र गहलावत
उपनिरीक्षक शोएब अली
कांस्टेबल दीपक कुमार
कांस्टेबल सोहन खत्री
हालांकि पुलिस की ओर से पहले इस मामले की विभागीय जांच हरिद्वार ट्रांसफर कर दी गई थी, जिसमें पुलिसकर्मियों को निर्दोष बताया गया था।
अब राज्य पुलिस प्राधिकरण की जांच में तत्कालीन एसएसपी और थाना प्रभारी की भूमिका पर सवाल उठे हैं, जिसके बाद गृह विभाग को कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
कौन हैं जनमेजय खंडूड़ी
जनमेजय खंडूड़ी 2007 बैच के उत्तराखंड कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं।
वे देहरादून सहित कई जिलों में एसएसपी के पद पर रह चुके हैं और हाल ही में उन्हें डीआईजी पद पर पदोन्नत किया गया था।
पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी खंडूड़ी ने कुंभ मेला पुलिस और एटीएस जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी सेवाएं दी हैं।



Admin






