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post authorAdmin 15 Mar 2026

Digital Census 2026 : 1 अप्रैल से शुरू होगी भारत की पहली डिजिटल जनगणना, हर नागरिक का बनेगा डिजिटल डेटा प्रोफाइल.

भारत एक ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। लगभग 150 वर्षों से चली आ रही कागजी जनगणना प्रणाली को पीछे छोड़ते हुए देश 1 अप्रैल 2026 से अपनी पहली डिजिटल जनगणना शुरू करने जा रहा है।

गृह मंत्रालय और भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (ORGI) के अनुसार इस बार जनगणना पूरी तरह मोबाइल ऐप, टैबलेट और क्लाउड आधारित सिस्टम से होगी। इसका उद्देश्य न केवल तेज और सटीक डेटा संग्रह करना है, बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक योजनाओं को भविष्य के लिए मजबूत आधार देना भी है।

कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में प्रस्तावित जनगणना स्थगित हो गई थी। अब यह प्रक्रिया आधुनिक तकनीक के साथ दो चरणों में आयोजित की जाएगी।

AI द्वारा निर्मित

जनगणना के दो चरण

चरण 1: मकान सूचीकरण और आवास गणना

समय: 1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026

इस चरण में देश के हर घर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। गणनाकार मोबाइल ऐप के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। इसमें मकानों की स्थिति, बुनियादी सुविधाएं और परिवार की संरचना से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।

चरण 2: जनसंख्या गणना

समय: फरवरी 2027

दूसरे चरण में देश के प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक जानकारी दर्ज की जाएगी। यही डेटा भारत की आधिकारिक जनसंख्या और जातिगत आंकड़ों का आधार बनेगा।

मकान सूचीकरण के दौरान पूछे जाएंगे 34 सवाल

पहले चरण में तीन प्रमुख श्रेणियों में जानकारी ली जाएगी।

1. घर और परिवार का विवरण

  • मकान नंबर और जनगणना पहचान

  • मकान की संरचना (पक्का या कच्चा)

  • मकान का उपयोग (रहने या व्यवसाय)

  • परिवार के मुखिया का नाम और लिंग

  • परिवार के सदस्यों की संख्या

  • क्या परिवार अनुसूचित जाति या जनजाति से है

  • मकान का स्वामित्व (स्वयं का या किराए का)

2. बुनियादी सुविधाएं

घर में कमरों की संख्या

पीने के पानी का स्रोत

बिजली कनेक्शन

शौचालय की उपलब्धता

खाना पकाने का ईंधन

गंदे पानी की निकासी व्यवस्था

3. घरेलू संपत्ति और डिजिटल पहुंच

रेडियो, टीवी

इंटरनेट सुविधा

कंप्यूटर या लैपटॉप

मोबाइल या टेलीफोन

साइकिल, बाइक, कार आदि वाहन

बैंकिंग सुविधा

दूसरे चरण में क्या पूछा जाएगा

जातिगत जनगणना

2026 की जनगणना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू व्यापक डिजिटल जातिगत डेटा संग्रह है। इससे भविष्य में आरक्षण नीति और सामाजिक योजनाओं पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

शिक्षा

प्रत्येक सदस्य की शैक्षणिक स्थिति और साक्षरता दर्ज की जाएगी।

भाषा

मातृभाषा और अन्य भाषाओं की जानकारी भी दर्ज होगी।

प्रवास

व्यक्ति का जन्मस्थान और वर्तमान निवास की जानकारी ली जाएगी।

रोजगार

काम का प्रकार और रोजगार की स्थिति दर्ज होगी।

राज्यों की तैयारी

हरियाणा

यहां परिवार पहचान पत्र (PPP) डेटा को आधार बनाकर जनगणना सत्यापन किया जाएगा। लगभग 60 हजार कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया है।

पंजाब

यहां बड़ी संख्या में एनआरआई और प्रवासी मजदूरों को ध्यान में रखते हुए विशेष डेटा व्यवस्था की गई है।

हिमाचल प्रदेश

दूरदराज क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन ऐप और अलग समय सीमा तय की गई है।

चंडीगढ़

यहां सेल्फ एन्यूमरेशन मॉडल लागू किया जा रहा है, जिसमें नागरिक स्वयं ऑनलाइन डेटा भर सकेंगे।

राजनीति और परिसीमन पर असर

यह जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है।

लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण संभव

महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया

राज्यों के लिए बजट आवंटन

विकास योजनाओं की दिशा तय होगी

डेटा सुरक्षा

सरकार के अनुसार:

डेटा 256-बिट एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेगा

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहेगी

डेटा भारत के सुरक्षित क्लाउड सर्वर में संग्रहित होगा

Digital Census 2026 भारत के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा डिजिटल डेटा अभियान बनने जा रहा है।

AI द्वारा निर्मित