दिए गए ‘एकात्म मानव दर्शन’ और आज के एआई-आधारित दौर में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि चर्चा का मुख्य विषय यह था कि भारतीय दार्शनिक विचार आधुनिक तकनीकों, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, के नैतिक और संतुलित उपयोग का मार्गदर्शन कैसे कर सकते हैं।
???? तकनीक और संस्कृति का संगम: पीएम मोदी की शिक्षा नीति पर केंद्रीय मंत्रियों की मुहर
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को शामिल करने की पहल को केंद्रीय मंत्रियों ने सोमवार को सराहा। उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से प्रेरित व्यापक शैक्षिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है।
राष्ट्रीय राजधानी में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से एआई आधारित तकनीकों को अपना रही है। उन्होंने बताया कि भारती एयरटेल फाउंडेशन के सहयोग से शिक्षकों के लिए एक विशेष ऐप विकसित किया गया था, जिसका उद्घाटन नवंबर 2024 में किया गया।
उन्होंने कहा, “आज भारत की शिक्षा प्रणाली विभिन्न स्तरों पर एआई के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रही है। शिक्षकों के लिए विकसित किया गया यह ऐप डिजिटल शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।”
प्रधान ने आगे जानकारी दी कि अब CK-12 Foundation के सहयोग से इस ऐप का नया संस्करण लॉन्च किया गया है, जिससे डिजिटल लर्निंग टूल्स और अधिक सशक्त होंगे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये सभी पहलें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के अनुरूप हैं, जिसमें भारतीय मूल्यों को केंद्र में रखते हुए शिक्षा के आधुनिकीकरण पर बल दिया गया है। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2035 तक देश को उपनिवेशवादी सोच से मुक्त करने का आह्वान किया है।
प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करते समय सरकार इस बात पर विशेष ध्यान दे रही है कि भारत की शिक्षा प्रणाली अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत को प्रतिबिंबित करे।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने प्रत्येक भाषण — चाहे वह संसद हो, ‘मन की बात’ हो या सार्वजनिक कार्यक्रम — में राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा, “यह सरकार की देश की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
मेघवाल ने एक सेमिनार का भी जिक्र किया, जिसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानव दर्शन’ और एआई युग में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय दार्शनिक विचार आधुनिक तकनीकों के नैतिक और संतुलित उपयोग के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं।




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