देहरादून:
उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। शासन स्तर पर सचिव से लेकर फील्ड में जिलाधिकारियों, एडीएम, एसडीएम, आईपीएस अधिकारियों और नगर आयुक्तों तक कई अहम पदों पर तबादलों की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है।
सूत्रों के मुताबिक कार्मिक विभाग ने इस व्यापक फेरबदल को लेकर विस्तृत होमवर्क कर लिया है और कई अधिकारियों की सूची तैयार की जा चुकी है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावी वर्ष को ध्यान में रखते हुए सरकार प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक सक्रिय बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठा रही है।
सरकार का फोकस खास तौर पर उन विभागों पर है जिनका सीधा संबंध आम जनता से है। ऐसे विभागों में कार्यों की गति तेज करने के लिए सक्षम अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति बनाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, इस प्रशासनिक बदलाव में सचिव और अपर सचिव स्तर के साथ-साथ जिलों में तैनात डीएम, एडीएम, सीडीओ, विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त और प्राधिकरण सचिव जैसे पद भी शामिल होंगे।
कार्मिक विभाग के अधिकारियों के अनुसार तबादला सूची चरणबद्ध तरीके से जारी की जा सकती है।
पहले चरण में सचिव स्तर, अपर सचिव और जिलाधिकारियों समेत वरिष्ठ फील्ड अधिकारियों के तबादले होने की संभावना है।
दूसरे चरण में एडीएम और एसडीएम स्तर के अधिकारियों के स्थानांतरण किए जाएंगे।
सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में प्रदेश के कई जिलों में प्रशासनिक स्तर पर लगातार बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा आईएएस अधिकारियों के साथ-साथ आईपीएस अधिकारियों के कार्यभार में भी कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन संभावित हैं।
फाइलें लटकाने वाले अधिकारियों पर नजर
इस बार कार्मिक विभाग उन अधिकारियों पर भी विशेष नजर रख रहा है जो लंबे समय तक फाइलों को लंबित रखते हैं। महीनों तक फाइलें लंबित रखने वाले अधिकारियों की कार्यशैली का मूल्यांकन किया जा रहा है।
खास तौर पर उन मामलों की जांच की जा रही है जहां केंद्र से बजट जारी होने के बावजूद राज्य स्तर पर विभागों को बजट जारी करने में अनावश्यक देरी हुई।
तीन साल पूरे करने वाले अफसर हटेंगे
शासन स्तर पर यह भी तय किया गया है कि जिन अधिकारियों ने किसी जिले या पद पर तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बदला जाएगा।
ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है ताकि चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देशों के कारण अचानक तबादलों की स्थिति न बने।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तबादला सूची चुनाव से पहले होने वाले सबसे बड़े प्रशासनिक फेरबदल के रूप में देखी जा रही है।




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