उत्तराखंड के अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब राज्य में स्कूल बसों और वैन का किराया स्कूल प्रबंधन की मनमर्जी से नहीं बल्कि सरकार द्वारा तय की गई रेट लिस्ट के अनुसार लिया जाएगा।
राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) ने बुधवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में पहली बार स्कूल बसों और वैन के लिए मासिक परिवहन शुल्क की सीमा निर्धारित कर दी है। इसके बाद प्रदेश के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को छात्रों से परिवहन शुल्क इसी निर्धारित दर के अनुसार ही लेना होगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया फैसला
इस मामले की शुरुआत नैनीताल हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका से हुई थी। सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि स्कूल बसों, टैक्सी और मैक्सी वाहनों द्वारा लिए जाने वाले परिवहन शुल्क को तय किया जाए।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में परिवहन आयुक्त बृजेश कुमार संत की अध्यक्षता में देहरादून में राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वाहन की कीमत, किस्त, चालक-परिचालक का वेतन, मेंटेनेंस, बीमा और ईंधन के खर्च सहित कई पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
इन सभी कारकों के आधार पर नई शुल्क दरें निर्धारित की गईं।
दूरी के हिसाब से तय हुआ किराया
नई दर सूची के अनुसार स्कूल बसों के लिए मासिक किराया दूरी के आधार पर तय किया गया है।
10 किमी तक दूरी – ₹2200 प्रति माह
10 से 20 किमी – ₹2700 प्रति माह
20 से 30 किमी – ₹3200 प्रति माह
30 किमी से अधिक – ₹3700 प्रति माह
स्कूल वैन के लिए अलग दरें
छोटी गलियों या कम दूरी के लिए चलने वाली स्कूल वैन और मैक्सी वाहनों के लिए भी अलग दरें तय की गई हैं।
5 किमी तक दूरी – ₹2100 प्रति माह
5 से 10 किमी – ₹2500 प्रति माह
10 से 20 किमी – ₹3000 प्रति माह
20 किमी से अधिक – ₹3500 प्रति माह
अभिभावकों को मिलेगी राहत
अब तक कई स्कूल परिवहन शुल्क मनमाने तरीके से वसूलते थे, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। लेकिन नई दरें लागू होने के बाद परिवहन शुल्क में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से स्कूल परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित होगी।



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