वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच भारत में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों ने एक अप्रैल से घरेलू एयरलाइनों के लिए ATF की कीमत में 8.56 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 1,04,927.18 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में भारी उछाल के बावजूद सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने घरेलू विमानन कंपनियों पर इसका पूरा बोझ नहीं डाला है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी
नॉन-शेड्यूल्ड, चार्टर और अन्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में भारी वृद्धि की गई है। इन उड़ानों के लिए कीमत 1,10,703 रुपये से बढ़ाकर 2,07,341 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव बना है।
घरेलू विमानन कंपनियों को राहत
पेट्रोलियम कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय से परामर्श के बाद घरेलू एयरलाइनों पर केवल आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि लागू की है।
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू के अनुसार यह कदम यात्रियों को हवाई किराए में अचानक वृद्धि से बचाने के लिए उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि यह नीति विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ व्यापार और लॉजिस्टिक्स को भी सुचारू रखने में मदद करेगी।
होटल-रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाला LPG भी महंगा
सरकार ने 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक LPG सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है।
दिल्ली में अब इसकी कीमत 2,078.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो LPG) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये प्रति सिलेंडर बनी हुई है।
प्रीमियम पेट्रोल-डीजल भी महंगे
कुछ प्रीमियम ईंधनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है।
XP100 पेट्रोल: 11 रुपये बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर
एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल: 1.50 रुपये बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर
हालांकि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं।
वैश्विक युद्ध का असर
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है।
बताया जा रहा है कि वैश्विक तेल कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल आ चुका है।
वहीं एयरलाइनों की कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत होती है, इसलिए ATF कीमतों में बढ़ोतरी से विमानन उद्योग पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।



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