उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। चार साल के इंतजार के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया गया है। दूसरे नवरात्र के शुभ अवसर पर पांच नए मंत्रियों ने शपथ लेकर धामी कैबिनेट को पूर्ण रूप दिया।
इस विस्तार के साथ ही भारतीय जनता पार्टी की मिशन 2027 की रणनीति भी स्पष्ट हो गई है। पार्टी ने यह संकेत दे दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी नेतृत्व की कमान मुख्यमंत्री धामी के हाथों में ही रहेगी।
दरअसल, वर्ष 2022 में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार उत्तराखंड में सत्ता हासिल कर एक बड़ा राजनीतिक मिथक तोड़ा था। राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटी और उसी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार बनी।
हालांकि, पिछले चार वर्षों से धामी सरकार में पांच मंत्री पद खाली थे, जिसके कारण राजनीतिक गलियारों में लगातार मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा चलती रही। अब विधानसभा चुनाव से लगभग दस महीने पहले कैबिनेट विस्तार कर पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
टीम इलेवन के साथ चुनावी मैदान
मुख्यमंत्री धामी ने चुनावी पिच पर उतरने के लिए अपनी “टीम इलेवन” तैयार कर दी है। नए और अनुभवी चेहरों के मिश्रण के साथ कैबिनेट का गठन किया गया है, ताकि आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।
कैबिनेट में शामिल नए और पुराने चेहरों में शामिल हैं—
खजान दास (देहरादून)
मदन कौशिक (हरिद्वार)
भरत चौधरी (रुद्रप्रयाग)
राम सिंह कैड़ा (भीमताल)
प्रदीप बत्रा (रुड़की)
इनमें खजान दास और मदन कौशिक पहले भी भाजपा सरकारों में मंत्री रह चुके हैं, जबकि भरत चौधरी, राम सिंह कैड़ा और प्रदीप बत्रा को पहली बार मंत्री बनने का मौका मिला है।
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर फोकस
मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है। खास बात यह है कि पहली बार हरिद्वार जिले से दो मंत्रियों को कैबिनेट में जगह मिली है।
त्रिवेंद्र सरकार के समय मदन कौशिक के हटने के बाद हरिद्वार का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया था। अब मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा के रूप में हरिद्वार को फिर से मजबूत प्रतिनिधित्व मिला है।
इसके साथ ही नौ वर्षों के बाद रुद्रप्रयाग जिले को भी कैबिनेट में स्थान मिला है। इससे गढ़वाल क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है।
2027 के लिए बड़ी जिम्मेदारी
अब नए मंत्रियों के सामने प्रदर्शन करने की बड़ी चुनौती होगी। विशेष रूप से हरिद्वार जिले में भाजपा की स्थिति को मजबूत करना बड़ी जिम्मेदारी मानी जा रही है।
2017 के चुनाव में भाजपा ने हरिद्वार की 11 में से 8 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में यह संख्या घटकर केवल तीन रह गई। ऐसे में मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा के कंधों पर जिले में भाजपा को मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी होगी।
वहीं, राम सिंह कैड़ा को कैबिनेट में शामिल कर भाजपा ने युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है, जबकि खजान दास को शामिल कर दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति भी स्पष्ट दिखाई दे रही है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री धामी ने संतुलित कैबिनेट बनाकर 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने की राजनीतिक पटकथा लिख दी है।




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