देहरादून / नैनीताल:
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चर्चित ‘मोहम्मद दीपक’ विवाद में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता दीपक कुमार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया पर बयानबाजी या “प्रवचन” देने के बजाय पुलिस जांच में सहयोग करना चाहिए।
उत्तराखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने कोटद्वार के जिम संचालक दीपक कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका में 26 और 31 जनवरी 2026 की घटनाओं से जुड़े मामलों में दर्ज FIR को रद्द करने, पुलिस सुरक्षा देने तथा पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इन अतिरिक्त मांगों को जांच को प्रभावित करने की कोशिश और दबाव बनाने की रणनीति बताते हुए खारिज कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता और अन्य संबंधित लोग इस मामले में सोशल मीडिया पर कोई भी वीडियो, संदेश या बयान पोस्ट नहीं करेंगे।
अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति थपलियाल ने कहा:“पुलिस का काम जांच करना है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
सोशल मीडिया पर प्रवचन देने से जांच प्रभावित होती है।
इसलिए इस मामले में सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार का बयान देना प्रतिबंधित किया जाता है।”
क्या था पूरा मामला
यह विवाद कोटद्वार में उस समय शुरू हुआ जब एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार को कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा परेशान किया जा रहा था।
इस दौरान जिम संचालक दीपक कुमार ने विरोध करते हुए भीड़ के सामने कहा—
“मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।”
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ दंगा, चोट पहुंचाने और भड़काऊ गतिविधियों से संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई।
दीपक कुमार ने इन आरोपों को पक्षपातपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट में क्या हुआ
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि:
दीपक कुमार की शिकायतों पर दो FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी थीं।
उन्हें अस्थायी सुरक्षा भी दी गई थी, लेकिन यह तथ्य याचिका में नहीं बताया गया।
बाहर से कई लोग जिम में उनसे मिलने आ रहे हैं और वह जांच में सहयोग करने के बजाय सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।
कोर्ट का रुख
अदालत ने कहा कि:
सुरक्षा दिए जाने का मतलब यह नहीं कि उसका दुरुपयोग किया जाए
पुलिस जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चल रही है
सभी पक्षों को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना चाहिए
अंतिम आदेश
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि:
FIR रद्द करने की मुख्य मांग पर सुनवाई आगे जारी रहेगी
लेकिन सुरक्षा और विभागीय जांच जैसी अतिरिक्त मांगें खारिज
इस मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर बयान देने से रोका गया
अदालत ने उम्मीद जताई कि पुलिस पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करेगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखेगी।



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