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post authorAdmin 21 Mar 2026

न जवान खोने का डर, न मोर्चे से पीछे हटने की फिक्र — अब रिमोट से दुश्मन पर कहर बरपाएंगे पुराने T-72 टैंक.

भारतीय सेना भविष्य के युद्ध की तैयारी में एक बड़ा और तकनीकी रूप से अहम कदम उठाने जा रही है। अब सेना अपने पुराने हो रहे T-72 मुख्य युद्धक टैंकों को रिटायर करने के बजाय उन्हें रिमोट से चलने वाले मानवरहित लड़ाकू वाहनों में बदलने की योजना पर काम कर रही है।

19 मार्च को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जारी एक दस्तावेज में इस योजना की जानकारी सामने आई है। इसके तहत भारतीय सेना अपने पुराने टैंकों को आधुनिक तकनीक से लैस करके Autonomous Armoured Fighting Vehicles में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

T-72 टैंकों का इतिहास

T-72 टैंक सोवियत मूल के हैं और 1979 से भारतीय सेना के बख्तरबंद बेड़े की रीढ़ रहे हैं। वर्तमान में सेना के पास लगभग 2400 T-72 टैंक हैं। इनमें से कई टैंक भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित किए गए हैं।

इन टैंकों को रेगिस्तान, मैदानी क्षेत्रों और लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया गया है। श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के मिशन के दौरान भी इन टैंकों ने अहम भूमिका निभाई थी।

हालांकि, 2030 के बाद इन्हें चरणबद्ध तरीके से रिटायर करने की योजना थी।

क्या है नया ऑटोनॉमस प्लान

सेना इन टैंकों को कबाड़ में बदलने के बजाय डिजिटल और रिमोट-कंट्रोल सिस्टम से लैस करेगी।

इन टैंकों में

IP आधारित इंटरफेस

रिमोट कंट्रोल सिस्टम

उन्नत सेंसर

आधुनिक कंट्रोल नेटवर्क

लगाए जाएंगे।

इससे इन टैंकों की उपयोगिता 15–20 साल तक बढ़ सकती है

सबसे बड़ी बात यह है कि नए टैंक खरीदने की तुलना में यह तरीका काफी कम खर्चीला होगा।

हाई-रिस्क मिशन में होंगे इस्तेमाल

इन मानवरहित टैंकों का उपयोग उन मिशनों में किया जाएगा जहां सैनिकों की जान का खतरा ज्यादा होता है।

जैसे:

माइनफील्ड में प्रवेश

दुश्मन को भ्रमित करने के लिए डिकॉय

अग्रिम सुरक्षा गार्ड

टोही मिशन

MUM-T तकनीक बनेगी गेमचेंजर

सेना MUM-T (Manned-Unmanned Teaming) तकनीक को लागू कर रही है।

इस तकनीक में
मानव संचालित हथियार और
मानवरहित सिस्टम

एक साथ युद्ध में काम करते हैं।

2025 के फील्ड अभ्यास में इस तकनीक का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।

इससे सेना की

निगरानी क्षमता

मारक शक्ति

युद्धक्षेत्र की जानकारी

कई गुना बढ़ जाएगी।

स्वदेशी तकनीक से होगा विकास

यह प्रोजेक्ट रक्षा मंत्रालय की iDEX (Innovations for Defence Excellence) पहल के तहत ADITI योजना के अंतर्गत किया जाएगा।

इसमें भारत की स्वदेशी कंपनियां रोबोटिक्स, सेंसर फ्यूजन, नेविगेशन और ऑटोमेशन तकनीक का इस्तेमाल करके Autonomous Kit विकसित करेंगी।

यह किट T-72 टैंक को

रिमोट से संचालित

या इंसानों द्वारा संचालित

दोनों तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता देगी।

अगर यह परियोजना सफल होती है तो यह भारतीय सेना के लिए भविष्य के युद्ध में एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है।

As Drone Threats Mount, Indian Army Considers Converting Soviet-era T-72  Tanks into Robotic Platforms for High-Risk Zones | Defence News India