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post authorAdmin 07 Apr 2026

बदरीनाथ: नरेंद्रनगर राजदरबार में महारानी और सुहागिनों ने पिरोया तिल का तेल, 22 अप्रैल को धाम पहुंचेगा तेल कलश.

उत्तराखंड के पवित्र चारधामों में प्रमुख बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन शुरू हो गया है। इसी कड़ी में टिहरी के नरेंद्रनगर राजदरबार में भगवान बदरी विशाल के महाभिषेक में उपयोग होने वाले तिल के तेल को पिरोने की पारंपरिक प्रक्रिया पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न की जा रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस प्रक्रिया की तिथि वसंत पंचमी के दिन तय की जाती है। परंपरा के मुताबिक बदरीनाथ मंदिर से जुड़े पुजारी समुदाय का मूल ग्राम डिम्मर से पुजारी ‘गाडू घड़ा’ लेकर नरेंद्रनगर स्थित टिहरी राजदरबार पहुंचते हैं।

निर्धारित मुहूर्त में चयनित सुहागिन महिलाएं भुने हुए तिलों को पारंपरिक विधि से पिरोने का कार्य शुरू करती हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक ‘गाडू घड़ा’ पूरी तरह से तिल के तेल से भर नहीं जाता। इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान में लगभग 8 से 10 घंटे का समय लगता है।

इस वर्ष टिहरी की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने भी सुहागिन महिलाओं के साथ इस पवित्र प्रक्रिया में भाग लिया और परंपरा का निर्वहन किया। तैयार किया गया तिल का तेल बाद में भगवान बदरी विशाल के ‘तेल कलश’ में भरा जाता है।

धार्मिक परंपरा के तहत नरेंद्रनगर राजदरबार से तेल कलश की शोभायात्रा ऋषिकेश के लिए रवाना होती है। यह यात्रा दो चरणों में बदरीनाथ मार्ग से होते हुए पुजारियों के मूल गांव डिम्मर पहुंचेगी और फिर वहां से आगे बढ़ते हुए 22 अप्रैल को बदरीनाथ धाम पहुंचेगी।

इसके बाद 23 अप्रैल को बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही तेल कलश को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा और इसी पवित्र तेल से भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाएगा।

इस धार्मिक आयोजन में केवल उन्हीं सुहागिन महिलाओं को शामिल किया जाता है जिन्हें इस परंपरा का पूरा ज्ञान और अनुभव हो। साथ ही जिन परिवारों में हाल ही में किसी सदस्य की मृत्यु हुई हो, उन महिलाओं को इस आयोजन में शामिल नहीं किया जाता।

टिहरी राजपरिवार की महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह ने कहा कि यह परंपरा सदियों से उनके पूर्वज निभाते आए हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी इसे आगे बढ़ाने की सीख दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राजपरिवार की नई पीढ़ी भी बदरीनाथ मंदिर से जुड़ी इन धार्मिक परंपराओं को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

The Viceregal Palace | Ananda In The Himalayas

                                                                                                                                           नरेंद्रनगर राजदरबार