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post authorAdmin 07 Apr 2026

तमिलनाडु:कल्पक्कम में भारत की परमाणु छलांग: स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने हासिल की ‘क्रिटिकलिटी’, ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम.

भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित परमाणु परिसर में विकसित किए गए स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार सफलतापूर्वक “क्रिटिकलिटी” प्राप्त कर ली है। इसका अर्थ है कि रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो चुकी है, जो बिजली उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी चरण माना जाता है।

500 मेगावाट क्षमता वाला यह रिएक्टर भारत की तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा योजना के दूसरे चरण की शुरुआत का संकेत देता है। इस महत्वाकांक्षी योजना की परिकल्पना महान परमाणु वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा, जो फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का व्यावसायिक संचालन करने की क्षमता रखता है। इससे पहले केवल रूस ने ही इस तकनीक का सफल संचालन किया है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना परमाणु ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक नया ईंधन तैयार कर सकता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ईंधन (MOX) का उपयोग किया जाता है और यह यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।

यह तकनीक भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन के लिए भी रास्ता खोलती है। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है, जिसे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण में उपयोग करने की योजना है।

भारत की तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा योजना

  • पहला चरण: यूरेनियम से बिजली उत्पादन और प्लूटोनियम तैयार करना
  • दूसरा चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के माध्यम से अधिक ईंधन तैयार करना
  • तीसरा चरण: थोरियम आधारित दीर्घकालीन ऊर्जा उत्पादन

यह पूरी प्रक्रिया “क्लोज्ड फ्यूल साइकिल” पर आधारित है, जिसमें उपयोग किए गए परमाणु ईंधन को दोबारा संसाधित कर पुनः उपयोग किया जाता है।

वर्तमान में भारत की कुल परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग 8.78 गीगावाट है। वर्ष 2024-25 के दौरान देश ने परमाणु ऊर्जा से 56,681 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया।

सरकार आने वाले वर्षों में इस क्षमता को बढ़ाकर 22.38 गीगावाट तक ले जाने की योजना बना रही है। वहीं, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए सरकार “न्यूक्लियर एनर्जी मिशन” के तहत करीब 20,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी नई तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कल्पक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सफलता भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तकनीकी क्षमता और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में एक निर्णायक उपलब्धि है।

Fuel loading begins at India's first fast breeder reactor in Kalpakkam,  ETEnergyworld