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post authorAdmin 08 Apr 2026

उत्तराखंड में साहित्यकारों के लिए बड़ा फैसला: साहित्य कल्याण कोष बनेगा, बुजुर्ग साहित्यकारों को मिलेगी पेंशन.

देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य के साहित्यकारों के सम्मान और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। भाषा मंत्री खजानदास ने विभागीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि राज्य में “साहित्य कल्याण कोष” का गठन किया जाए और वरिष्ठ साहित्यकारों के लिए पेंशन योजना शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।

सचिवालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में भाषा विभाग की योजनाओं की समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के युवा और बाल साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए जाएं। साथ ही भाषा विभाग की गतिविधियों के विस्तार के लिए विभागीय बजट बढ़ाने का भी प्रस्ताव तैयार किया जाए।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं को संरक्षित करने के लिए गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार-बावर क्षेत्रों में होने वाले पौराणिक गायनों का अभिलेखिकरण और दस्तावेजीकरण किया जाएगा।

विशेष रूप से जौनसार-बावर क्षेत्र में प्रचलित पांडवाणी गायन “बाकणा”, जो अब विलुप्ति के कगार पर है, उसे संरक्षित करने के लिए मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों में जाकर स्थलीय अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा भाषा संस्थान की साधारण सभा के गठन के लिए जिलों से साहित्यकारों के नाम मांगे जाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।

बैठक में सचिव उमेश नारायण पांडेय, निदेशक मायावती डकरियाल, जसविंदर कौर सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।