उत्तरकाशी, उत्तराखंड।
उत्तरकाशी जिले के धौंतरी क्षेत्र में युवाओं के तकनीकी भविष्य का सपना लगभग एक दशक से अधर में लटका हुआ है। वर्ष 2014 में स्थानीय ग्रामीणों ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) की स्थापना के लिए करीब 20 नाली भूमि दान की थी, लेकिन सरकारी उदासीनता और प्रशासनिक ढिलाई के चलते यह परियोजना आज तक पूरी तरह साकार नहीं हो पाई।
जानकारी के अनुसार, आईटीआई धौंतरी के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी शासन द्वारा नामित कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को सौंपी गई थी। प्रारंभिक चरण में भूमि समतलीकरण, पिलर निर्माण और संपर्क सड़क जैसी आधारभूत संरचनाओं पर काम शुरू भी हुआ।
इसी दौरान प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय की ओर से राजकीय इंटर कॉलेज धौंतरी में अस्थायी रूप से फिटर ट्रेड की कक्षाएं भी शुरू की गईं, जिससे क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण मिलने लगा।
हालांकि, वर्ष 2019 के बाद इन कक्षाओं को बंद कर दिया गया और नए प्रवेश लेना भी रोक दिया गया। इसके बाद से यह परियोजना लगभग ठप पड़ी हुई है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि पिछले नौ वर्षों में इस परियोजना पर कितना खर्च हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी तक विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। अब निदेशालय स्तर से कार्यदायी संस्था से परियोजना पर हुए खर्च का विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है।
उधर, परियोजना के लिए खरीदा गया प्रशिक्षण उपकरण भी उपयोग के अभाव में राजकीय इंटर कॉलेज धौंतरी के एक कमरे में रखा-रखा खराब हो रहा है।
स्थानीय निवासी राजू दास का कहना है कि ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जमीन दान की थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी आईटीआई की स्थिति जस की तस बनी हुई है। उनके अनुसार इस परियोजना पर अब तक करीब एक करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, फिर भी संस्थान शुरू नहीं हो पाया।
इस संबंध में आईटीआई बड़कोट के प्रधानाचार्य हरि प्रसाद सेमवाल का कहना है कि एक समय स्थानीय स्तर पर कुछ कारणों से निर्माण कार्य रुक गया था। अब निदेशालय स्तर से दोबारा प्रक्रिया शुरू की जा रही है और कार्यदायी संस्था से खर्च का पूरा विवरण मांगा गया है।
फिलहाल धौंतरी के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा का यह सपना अभी भी अधूरा है और ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही शासन-प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा।



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