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post authorAdmin 09 Apr 2026

देहरादून: कक्षाओं में मोबाइल फोन पर सख्ती, उत्तराखंड सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन — कक्षा 1 में प्रवेश की उम्र भी तय.

देहरादून।
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में कक्षा के दौरान मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था के अनुसार अब कक्षा में शिक्षक और छात्र बिना शैक्षिक आवश्यकता के मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों में मोबाइल फोन के बढ़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य छात्रों में डिजिटल अनुशासन बढ़ाना और पढ़ाई के दौरान अनावश्यक मोबाइल उपयोग को रोकना है।

शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में अब मोबाइल फोन का उपयोग केवल शैक्षिक गतिविधियों तक ही सीमित रहेगा। स्कूलों के लिए मोबाइल उपयोग के स्पष्ट मानक तय किए गए हैं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग के परामर्श से तैयार किया गया है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से छात्रों का समय बर्बाद होता है और इससे उनके शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रशासनिक प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि मोबाइल का उपयोग विद्यालयी अनुशासन और पठन-पाठन को प्रभावित न करे।

इसके साथ ही छात्रों में बेहतर डिजिटल व्यवहार विकसित करने, तकनीकी जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही समय-समय पर अभिभावकों को भी मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा।

कक्षा 1 में प्रवेश की आयु भी तय

उत्तराखंड सरकार ने कक्षा एक में प्रवेश की आयु को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। शिक्षा सचिव रविनाथ रमन के अनुसार सरकारी स्कूलों में कक्षा एक में प्रवेश के लिए एक जुलाई तक बच्चे की आयु छह वर्ष पूरी होना अनिवार्य होगी।

वहीं, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पहले की तरह एक अप्रैल को छह वर्ष की आयु का मानक लागू रहेगा।

शिक्षा विभाग के अनुसार आरटीई के तहत कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष की आयु अनिवार्य है, लेकिन उत्तराखंड की भौगोलिक और विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी स्कूलों के लिए आयु सीमा में यह विशेष व्यवस्था की गई है।

सरकार का कहना है कि इस निर्णय से लंबे समय से चल रहा असमंजस समाप्त होगा और अभिभावकों तथा शिक्षकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकेंगे।