kotha
post authorAdmin 15 Apr 2026

क्रैश इतिहास वाली कंपनियां फिर मैदान में! उत्तराखंड एविएशन में नियमों की धज्जियां?.

देहरादून:

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान संचालित हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर एक बार फिर सुरक्षा संबंधी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में हुए हादसों और तकनीकी खामियों के बावजूद उन्हीं ऑपरेटर कंपनियों की वापसी पर चर्चा तेज हो गई है, जिनका रिकॉर्ड पहले विवादों में रहा है।

लगातार हादसे और बढ़ती चिंता

केदारनाथ समेत ऊंचाई वाले रूट्स पर हाल के वर्षों में कई दुर्घटनाएं और इमरजेंसी लैंडिंग की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच उड़ान संचालन में उच्च स्तर की सतर्कता की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद बार-बार सामने आ रही घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

नियामकीय सख्ती, लेकिन सवाल बरकरार

लगातार घटनाओं के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हेलीकॉप्टर सेवाओं की निगरानी बढ़ाने, विशेष ऑडिट कराने और संचालन में सुधार के निर्देश दिए थे। कुछ मामलों में कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई, लेकिन अब उन्हीं कंपनियों के दोबारा सक्रिय होने की खबरों ने नियमों के पालन पर नई बहस छेड़ दी है।

क्या नियमों का हो रहा पालन?

सूत्रों के अनुसार, जिन ऑपरेटरों पर पहले सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोप लगे थे, उन्हें फिर से संचालन की अनुमति दिए जाने को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि क्या सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है या नहीं।

भौगोलिक चुनौती और तकनीकी जोखिम

विशेषज्ञ बताते हैं कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन बेहद जटिल होता है। सीमित विजिबिलिटी, अचानक बदलता मौसम और संकरे लैंडिंग स्थल जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे में केवल अनुभवी पायलट और पूरी तरह सक्षम तकनीकी व्यवस्था ही सुरक्षित संचालन सुनिश्चित कर सकती है।

आगे की राह

सरकारी एजेंसियां लगातार निगरानी और समीक्षा की बात कर रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी और सख्त व्यवस्था की मांग लगातार उठ रही है।