उत्तराखंड।
कहते हैं कि मजबूत सोच और दृढ़ संकल्प हो तो बदलाव के लिए केवल सरकारी तंत्र पर निर्भर रहना जरूरी नहीं होता। इसका सजीव उदाहरण प्रस्तुत किया है पट्टी मनियारस्यूं के ग्राम बुटली निवासी प्रवासी नागरिक चंद्र प्रकाश कुकरेती ने, जिन्होंने अपने निजी संसाधनों से गांव के विकास की नई दिशा तय की है।
चंद्र प्रकाश कुकरेती न केवल एक सफल प्रवासी हैं, बल्कि अपने गांव और समाज के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता उन्हें विशिष्ट बनाती है। उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय नीलम कुकरेती की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर 14 अप्रैल को, डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के दिन, गांव बुटली में उनकी स्मृति में पौधरोपण कार्यक्रम तथा दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण का आयोजन किया गया।
इस आयोजन के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी परिचय दिया।
इससे पूर्व भी चंद्र प्रकाश कुकरेती गांव में कई महत्वपूर्ण कार्य कर चुके हैं। उन्होंने मां बाल कुंवारी देवी एवं इष्टदेव नागराजा मंदिर का जीर्णोद्धार कर उन्हें भव्य स्वरूप प्रदान किया। इसके लिए विशेष रूप से उड़ीसा से कारीगर बुलाए गए।
इसके अतिरिक्त उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र में छोटे बच्चों के लिए झूले लगवाए और मुख्य सड़क से मंदिर तक लगभग 50-50 मीटर के संपर्क मार्ग का सीसी निर्माण भी करवाया।
उन्होंने अपने पुश्तैनी मकान का पुनर्निर्माण कर उसे भव्य दो मंजिला भवन में परिवर्तित किया, जिससे अपने माता-पिता के सपनों को साकार किया।
कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों के लिए हेल्थ केयर काउंसलिंग और योग अभ्यास का आयोजन भी किया गया तथा अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य सविता देवी, ग्राम प्रधान रेनू कपटियाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
चंद्र प्रकाश कुकरेती की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो व्यक्तिगत प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।



Admin






