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post authorAdmin 02 Apr 2026

डोईवाला के प्रभारी बीईओ रिश्वत लेते गिरफ्तार.

ऋषिकेश / डोईवाला, देहरादून:
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच विजिलेंस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डोईवाला में तैनात प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) धनवीर सिंह बिष्ट को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

मामला शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी विद्यालय को मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति की धनराशि से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि भुगतान जारी करने के बदले अधिकारी द्वारा मोटी रिश्वत की मांग की जा रही थी।

जानकारी के अनुसार, आरोपी अधिकारी एक निजी विद्यालय से संबंधित आरटीई भुगतान के बिल पास कराने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत ले रहे थे। शिकायत मिलने के बाद Dehradun विजिलेंस टीम ने पूरी योजना बनाकर ट्रैप ऑपरेशन चलाया और नेपाली फार्म तिराहे के पास आरोपी अधिकारी को रिश्वत की रकम लेते हुए दबोच लिया।

शिक्षा विभाग में दो पदों की जिम्मेदारी

धनवीर सिंह बिष्ट पुत्र गिंदू सिंह वर्तमान में डोईवाला में उप शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही उन्हें प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था।

आरटीई भुगतान के बदले मांगी रिश्वत

मामले में शिकायतकर्ता हिमांशु गुप्ता, जो आशुतोष नगर मनीराम रोड स्थित गंगा वैली जूनियर हाई स्कूल के संचालक हैं, ने आरोप लगाया कि आरटीई के तहत छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति से जुड़े बिलों को पास कराने के बदले उनसे एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।

महिला सहयोगी भी गिरफ्तार

विजिलेंस टीम ने इस मामले में एक महिला सहयोगी पुष्पांजलि, पत्नी पंकज शर्मा, निवासी डालनवाला, देहरादून को भी गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि वह गुमानीवाला ऋषिकेश स्थित एक निजी स्कूल की संचालिका है और इस लेनदेन में उसकी भूमिका सामने आई है।

दो घंटे तक चली पूछताछ

नेपाली फार्म से गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी से लगभग दो घंटे तक पूछताछ की गई। बरामद किए गए एक लाख रुपये की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पिछले करीब 15 दिनों से शिकायतकर्ता पर रिश्वत देने का दबाव बनाया जा रहा था।

कई नाम सामने आने की आशंका

विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान अन्य लोगों के नाम सामने आने की भी संभावना जताई जा रही है।

बताया गया है कि विद्यालय का करीब 3.85 लाख रुपये का भुगतान लंबित था, जिसके बदले आरोपी अधिकारी द्वारा 2.25 लाख रुपये की मांग की गई थी।

एक साल पहले बंद हो चुका था विद्यालय

जिस गंगा वैली जूनियर हाई स्कूल से यह मामला जुड़ा है, वह लगभग एक साल पहले ही बंद हो चुका था। स्कूल प्रबंधन के अनुसार पढ़ाई बंद होने के बाद संबंधित दस्तावेज शिक्षा विभाग को जमा करा दिए गए थे।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विजिलेंस निदेशक Pushkar Singh Dhami सरकार की नीति का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी है।