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post authorAdmin 02 Apr 2026

फ्यूल संकट के बीच भारत की मदद से भूटान गदगद, पीओएल-एलपीजी सप्लाई जारी रखने पर जताया आभार.

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब हिमालयी देश भूटान तक पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के कारण भूटान सरकार को देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का फैसला करना पड़ा है।

इस बीच भूटान सरकार ने पड़ोसी देश भारत का आभार व्यक्त किया है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद भूटान को पीओएल (Petroleum Oil Lubricants) और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति जारी रखी है।

भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे के कार्यालय ने 1 अप्रैल को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए देश की जनता को बढ़ती कीमतों के पीछे की वजह बताई। सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जो भूटान के नियंत्रण से बाहर हैं।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और लंबी दूरी के सफर को सीमित करें।

कीमतों में तेज बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद से ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है।

फरवरी में पेट्रोल की कीमत लगभग 65 न्गुलट्रम (NU) प्रति लीटर थी।

1 अप्रैल तक यह बढ़कर 95 न्गुलट्रम तक पहुंच गई।

सरकारी आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 की आधी रात से राजधानी थिंपू में पेट्रोल की खुदरा कीमत 114.31 न्गुलट्रम प्रति लीटर और डीजल की कीमत 174.13 न्गुलट्रम प्रति लीटर निर्धारित की गई है।

हालांकि, सरकार ने जनता पर बोझ कम करने के लिए सब्सिडी लागू की है। सब्सिडी के बाद पेट्रोल की कीमत 98.00 न्गुलट्रम प्रति लीटर और डीजल की कीमत 98.31 न्गुलट्रम प्रति लीटर तय की गई है।

सरकार ने शुरू की फ्यूल सब्सिडी योजना

भूटान सरकार ने 21 मार्च 2026 को नेशनल फ्यूल प्राइस स्मूथनिंग फ्रेमवर्क (NFPSF) के तहत फ्यूल सब्सिडी लागू की थी। इसका उद्देश्य बढ़ती कीमतों के कारण घरों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करना है।

जनता से सहयोग की अपील

सरकार ने देश के खजाने पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए सरकारी एजेंसियों को ईंधन की खपत कम करने के निर्देश दिए हैं।

इसके तहत:

पैदल चलने को बढ़ावा

गैर-जरूरी यात्राओं से बचना

वर्क-फ्रॉम-होम को प्राथमिकता देना

भारत को कहा धन्यवाद

भूटान सरकार ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति संकट के बावजूद भारत लगातार पीओएल और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है, जिससे देश में ऊर्जा संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सका है।

करीब 8 लाख की आबादी वाला भूटान अपने अधिकांश ईंधन का आयात भारत के माध्यम से करता है। इसलिए भारत की आपूर्ति भूटान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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