उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और अंतर्कलह अब विनाशकारी मोड़ पर आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 15 दिनों के 'राजनीतिक अवकाश' पर जाने के फैसले ने पार्टी में भूचाल ला दिया है। विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली में ज्वाइनिंग के दौरान रावत के करीबी संजय नेगी का नाम आखिरी वक्त पर रोक दिया गया। इसके बाद हरीश रावत की नाराजगी पर पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने तंज कसते हुए इसे 'व्यक्तिवाद' करार दिया। पलटवार में धारचूला विधायक हरीश धामी ने हरक सिंह पर 2016 में सरकार गिराने का 'महापाप' याद दिलाते हुए रावत समर्थकों से सामूहिक इस्तीफे का आह्वान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल इसे सामान्य मामला बता रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर दरारें गहरी हो चुकी हैं।
हरक बनाम हरीश धामी; क्या उत्तराखंड कांग्रेस में होने वाली है बड़ी टूट?
उत्तराखंड की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ी खबर कांग्रेस के भीतर मचे घमासान की है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अचानक 'राजनीतिक अवकाश' पर जाने के बाद पार्टी दो फाड़ नजर आ रही है।
मुख्य बिंदु:
विवाद की जड़: पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी की ज्वाइनिंग रुकने से हरीश रावत नाराज।
हरक सिंह का तंज: "किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि उसके बिना पार्टी नहीं चलेगी।"
हरीश धामी का प्रहार: विधायक धामी ने हरक सिंह को 2016 का 'गद्दार' बताते हुए समर्थकों से सामूहिक इस्तीफे की अपील की।
प्रदीप टम्टा का समर्थन: पूर्व सांसद टम्टा भी रावत के पक्ष में खड़े दिखे।
कांग्रेस हाईकमान के लिए स्थिति बेहद नाजुक हो गई है, क्योंकि एक तरफ अनुभवी रावत हैं तो दूसरी तरफ हमलावर हरक सिंह।



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