पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते युद्ध के संकट के बीच भारत सरकार ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कमर कस ली है। शुक्रवार को DPIIT और विद्युत मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में फैसला लिया गया कि भारत अब एलपीजी (LPG) पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू स्तर पर इंडक्शन हीटर और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देगा। कतर के एलएनजी प्लांट को पहुंचे नुकसान और होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते यह कदम उठाया गया है। डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को 'पाषाण युग' में भेजने वाली चेतावनी के बाद भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर और भी गंभीर हो गया है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर 'बेहरी कड़े प्रहार' की चेतावनी के बाद तेल और गैस की कीमतों में उछाल की संभावना है। इसी बीच, भारत सरकार ने 'घरेलू इंडक्शन उत्पादन' को मिशन मोड में बढ़ाने का फैसला किया है।
मुख्य बिंदु:
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: वैश्विक ऊर्जा का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है, जो अब खतरे में है।
सप्लाई में विविधता: भारत अब रूस, नाइजीरिया और अंगोला से कच्चे तेल का आयात बढ़ा रहा है।
इलेक्ट्रिक कुकिंग: सरकार का लक्ष्य है कि हर रसोई तक बिजली से चलने वाले चूल्हे पहुँचें ताकि गैस की किल्लत का असर न पड़े।
आयात शुल्क में कटौती: पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर ड्यूटी कम की गई है ताकि महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।



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