उत्तराखंड में शारीरिक शिक्षा को स्कूल स्तर पर लागू करने और व्यायाम शिक्षकों की भर्ती की मांग को लेकर निकली पदयात्रा शुक्रवार को ऋषिकेश पहुंच गई। यह पदयात्रा केदारनाथ गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर से शुरू हुई थी और आंदोलनकारी अब देहरादून पहुंचकर मुख्यमंत्री से सीधी वार्ता करने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने बताया कि 19 तारीख को ओंकारेश्वर मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस पदयात्रा की शुरुआत की गई थी। उनका कहना है कि राज्य में वर्ष 2016 के बाद से व्यायाम शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी है। वहीं, नई शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बावजूद स्कूलों में शारीरिक शिक्षा के पदों का सृजन नहीं किया गया है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि स्कूलों में शारीरिक शिक्षा को नजरअंदाज किए जाने से छात्रों के सर्वांगीण विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना है कि खेल और फिटनेस शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण यह व्यवस्था कमजोर हो गई है।
पदयात्रा में शामिल आंदोलनकारी जगदीश चंद्र पांडे, गोविंद सिंह, महेश नेगी और वीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, एलटी और प्रवक्ता स्तर तक व्यायाम शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इससे न केवल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण खेल शिक्षा नहीं मिल पा रही है, बल्कि युवाओं के रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि सभी स्तरों पर शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के पदों का सृजन किया जाए, लंबित भर्तियों को जल्द शुरू किया जाए और इसके लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
उन्होंने बताया कि वे केदारनाथ धाम का प्रसाद लेकर मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे हैं और उनसे इस मुद्दे पर सकारात्मक वार्ता की उम्मीद कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही वार्ता नहीं होती है तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



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