उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कौसानी स्थित एक सरकारी स्कूल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल परिसर में कथित तौर पर भटकती आत्मा को शांत करने के लिए एक छोटा मंदिर बना दिया गया। इस मंदिर के निर्माण के लिए छात्रों से पैसे भी इकट्ठा किए गए। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।
30 साल से भटकने की चर्चा
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब तीन दशक पहले स्कूल परिसर में एक नेपाली मजदूर की गिरकर मौत हो गई थी। इसके बाद से यह चर्चा फैल गई कि मजदूर की आत्मा स्कूल परिसर में भटकती है। इसी वजह से समय-समय पर कुछ अजीब घटनाएं होने की बातें भी सामने आती रही हैं।
छात्राओं के बेहोश होने की घटना
बताया जा रहा है कि कुछ महीने पहले स्कूल में कई छात्राएं अचानक बेहोश हो गई थीं। मेडिकल जांच में छात्राओं में किसी प्रकार की बीमारी नहीं पाई गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने इसे कथित तौर पर ‘आत्मा के साये’ से जोड़ना शुरू कर दिया।
इन घटनाओं के बाद स्कूल प्रबंधन और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा हुई और परिसर में एक छोटा मंदिर बनाने का निर्णय लिया गया।
छात्रों से जुटाए गए पैसे
मंदिर निर्माण के लिए पैरेंट-टीचर एसोसिएशन (PTA) के माध्यम से कक्षा 6 से 12 तक के करीब 218 छात्रों से 100-100 रुपये लिए गए। इसके अलावा अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने भी आर्थिक सहयोग किया।
बताया जाता है कि लगभग 25 हजार रुपये की लागत से स्कूल परिसर में यह मंदिर बनवाया गया।
शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने गंभीरता दिखाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि छात्रों से बिना अनुमति पैसे लेने और वित्तीय अनियमितता की संभावना की जांच की जाएगी।
इस मामले की जांच की जिम्मेदारी खंड शिक्षाधिकारी गरुड़ को सौंपी गई है।
प्रिंसिपल का बयान
स्कूल के प्रिंसिपल ताजबर सिंह नेगी ने सफाई देते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए पैसे अभिभावकों की सहमति से जुटाए गए थे। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य सिर्फ स्कूल में शांत माहौल बनाना था, ताकि बच्चे बिना किसी डर के पढ़ाई कर सकें।
यह मामला शिक्षा व्यवस्था में अंधविश्वास और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
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