उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज की पारंपरिक सोच को चुनौती दे दी है। जहां आमतौर पर बेटी के तलाक को परिवार की बदनामी या दुख से जोड़ा जाता है, वहीं मेरठ के एक सेवानिवृत्त जिला जज ने इसे बेटी की नई शुरुआत के रूप में मनाकर समाज को मजबूत संदेश दिया है।
मेरठ के शास्त्री नगर निवासी रिटायर्ड जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता शर्मा के तलाक को दुख नहीं बल्कि साहसिक निर्णय मानते हुए उसका स्वागत ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और मिठाइयों के साथ किया।
7 साल बाद मिला तलाक
जानकारी के अनुसार प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर निवासी आर्मी मेजर गौरव अग्निहोत्री के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष का व्यवहार बदल गया और प्रणिता को मानसिक, शारीरिक तथा भावनात्मक रूप से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
काफी प्रयासों के बावजूद जब हालात नहीं सुधरे, तो अंततः प्रणिता ने मेरठ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। लगभग 7–8 वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद 4 अप्रैल 2026 को मेरठ फैमिली कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी।
कचहरी से घर तक जश्न
तलाक का फैसला आने के बाद जब प्रणिता कोर्ट से बाहर निकलीं, तो परिवार और रिश्तेदारों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। परिजनों ने काले रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी, जिस पर लिखा था —
“I LOVE MY DAUGHTER”
कचहरी से लेकर घर तक नाचते-गाते हुए परिवार ने खुशी जाहिर की और मोहल्ले में मिठाइयां भी बांटीं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
एलीमनी या सामान नहीं लिया
डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कहा कि उनकी बेटी कोई वस्तु नहीं है। उन्होंने ससुराल पक्ष से कोई एलीमनी या सामान वापस नहीं लिया।
उनका कहना है —“जब बेटी की विदाई ढोल-नगाड़ों के साथ हुई थी, तो उसकी वापसी भी सम्मान और खुशी के साथ होनी चाहिए।”
महिलाओं को दिया संदेश
प्रणिता शर्मा ने भी महिलाओं से अपील की कि यदि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या प्रताड़ना का सामना कर रही हैं, तो चुप रहने के बजाय आवाज उठाएं।
उन्होंने कहा कि बेटियों की शादी जल्दी करने से ज्यादा जरूरी है कि उन्हें शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाया जाए।
मेरठ में इस अनोखी पहल और पिता के साहसिक कदम की व्यापक सराहना हो रही है।




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