उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा गांव का दौरा कर विकास कार्यों का निरीक्षण किया और स्थानीय जनता तथा श्रद्धालुओं से संवाद किया।
मुख्यमंत्री के आगमन पर गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीतों के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ आत्मीय बातचीत करते हुए क्षेत्र की समस्याओं और संभावनाओं को समझा।
मुख्यमंत्री धामी ने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण में सभी की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्थानीय उत्पाद खरीदने का आह्वान किया, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने गांव की “लखपति दीदी” महिलाओं से मुलाकात की और उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद न केवल उनकी आय बढ़ा रहे हैं बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी सशक्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है। “वाइब्रेंट विलेज योजना” के तहत इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे रोजगार और पर्यटन के अवसर बढ़ रहे हैं।
माणा गांव आज उत्तराखंड का पहला ऐसा गांव बन गया है जहां 100 प्रतिशत महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। यहां 12 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 82 महिलाएं विभिन्न कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।
महिलाएं ऊनी वस्त्र, हैंडीक्राफ्ट, खाद्य उत्पाद, फर्नीचर और अन्य स्थानीय उत्पादों का निर्माण कर रही हैं, जिनका विपणन विभिन्न माध्यमों से किया जा रहा है।
माणा गांव अब महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सीमांत विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।



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