सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैध माना, चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका पर जताया भरोसा
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को संवैधानिक ढांचे के अनुरूप माना।
फैसले के बाद अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर प्रक्रिया कानून, नियम और संविधान के अनुरूप है।
अश्विनी उपाध्याय के अनुसार, इस मामले में करीब 20 याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें एसआईआर प्रक्रिया का विरोध किया गया था। उनका कहना है कि इन याचिकाओं के जरिए चुनाव आयोग और उसकी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने की कोशिश की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम पुनरीक्षण प्रक्रिया में छूट जाता है, तो इससे यह साबित नहीं होता कि वह विदेशी नागरिक है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित ट्रिब्यूनल द्वारा किया जाएगा, जिसे पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं अधिवक्ता अश्वनी सिंह ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों को स्वीकार किया है। उनके अनुसार अदालत ने माना कि एसआईआर प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संचालित की गई और इसका उद्देश्य फर्जी मतदाताओं तथा अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना था।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने में बीएलओ की रिपोर्ट और प्रक्रिया का पालन किया गया तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अदालत ने संतोष व्यक्त किया।
इस फैसले के बाद चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है।
अश्विनी उपाध्याय-राजनेता और वकील



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