देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर संचालित होने वाले घोड़ों और खच्चरों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। यात्रा सीजन के दौरान बढ़ती भीड़, पशु कल्याण संबंधी चिंताओं तथा न्यायालयों के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रजिस्ट्रेशन, स्वास्थ्य परीक्षण और माइक्रोचिपिंग को अनिवार्य बना दिया है।
नई व्यवस्था के अनुसार अब बिना पंजीकरण वाले किसी भी घोड़े या खच्चर को चारधाम यात्रा मार्गों पर संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। पशुपालन विभाग द्वारा जारी SOP में केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश यात्रा मार्गों के लिए विशेष दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
प्रतिदिन तय होगी पशुओं की संख्या
सरकार ने यात्रा मार्गों पर भीड़ और पशुओं पर दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रतिदिन संचालन की अधिकतम सीमा निर्धारित की है।
केदारनाथ मार्ग – अधिकतम 5,000 घोड़े-खच्चर
हेमकुंड साहिब मार्ग – अधिकतम 1,050
यमुनोत्री मार्ग – अधिकतम 595
इसके अलावा यात्रा टोकन केवल सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही जारी किए जाएंगे।
रात में संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित
नई SOP के तहत सूर्यास्त से सूर्योदय तक घोड़ों और खच्चरों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। वहीं बारिश, बर्फबारी, ओलावृष्टि या अन्य खराब मौसम की स्थिति में पशुओं के संचालन की अनुमति नहीं होगी।
रजिस्ट्रेशन और माइक्रोचिपिंग होगी जरूरी
सभी पशु मालिकों को जिला पंचायत में वार्षिक पंजीकरण कराना होगा। प्रत्येक घोड़े और खच्चर का स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स रोग की जांच, कान में पहचान टैग और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य होगी।
स्वास्थ्य प्रमाणपत्र केवल 45 दिनों तक वैध रहेगा। इसके बाद पशुओं का पुनः स्वास्थ्य परीक्षण कराना आवश्यक होगा।
पशु क्रूरता पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने पशुओं पर अत्यधिक भार डालने, उन्हें जबरन दौड़ाने, मारपीट करने अथवा बीमार और घायल पशुओं से कार्य लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक पशु के साथ एक हैंडलर का मौजूद रहना अनिवार्य होगा। साथ ही एक मालिक अधिकतम दो घोड़े-खच्चरों का ही संचालन कर सकेगा।
नियम तोड़े तो होगी FIR
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और आवश्यक होने पर आपराधिक FIR भी दर्ज की जाएगी।
सरकार का मानना है कि नई SOP से चारधाम यात्रा मार्गों पर पशुओं की सुरक्षा, यात्रियों की सुविधा और संचालन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।



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