देहरादून : उत्तराखंड की सियासत में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आई है। देहरादून में आयोजित वरिष्ठ नेता ‘हरदा’ की चर्चित फल पार्टी में पार्टी के कई प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस आयोजन को आपसी संवाद और संगठनात्मक एकजुटता के प्रयास के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति ने अलग ही संकेत दे दिए।
जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में प्रदेश स्तर के कई वरिष्ठ नेता नहीं पहुंचे। इनमें कुछ पूर्व पदाधिकारी और सक्रिय संगठनात्मक चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं। उनकी गैरहाजिरी को केवल संयोग नहीं, बल्कि अंदरूनी असहमति और गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य इकाई में लंबे समय से चल रही खींचतान अब सार्वजनिक तौर पर दिखने लगी है। नेतृत्व, संगठनात्मक फैसलों और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद लगातार गहराते नजर आ रहे हैं।
यह भी माना जा रहा है कि आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए इस तरह की दूरी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। कार्यकर्ताओं के स्तर पर भी इस स्थिति को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है, जिससे संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं का कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण हुआ और इसे किसी बड़े मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि अंदरखाने सब कुछ सामान्य नहीं है।
ऋषिकेश की यह घटना उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर बढ़ती खटास और गुटीय समीकरणों की एक और झलक मानी जा रही है, जिस पर आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति काफी अहम साबित होगी।



Admin






