उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के कोटद्वार क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। यहां एक सरकारी शिक्षक की नियुक्ति को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने चार दशक पुरानी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बालकनगर में तैनात शिक्षक नफीस अहमद की नियुक्ति वर्ष 1985 में हुई थी। उस समय यह क्षेत्र अविभाजित उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। नियमों के मुताबिक प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित थी।
लेकिन विभागीय जांच में सामने आया कि नियुक्ति के समय नफीस अहमद की उम्र 17 वर्ष 7 माह 11 दिन थी। यानी वे निर्धारित आयु से चार माह 19 दिन कम थे, इसके बावजूद उन्हें सरकारी नौकरी मिल गई।
यह मामला तब उजागर हुआ जब स्थानीय पार्षद विपिन डोबरियाल ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि नफीस अहमद लगभग 40 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं और अब उनकी सेवानिवृत्ति में केवल दो वर्ष का समय बचा है। इतना ही नहीं, उन्हें वर्ष 2023 में प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
अब शिक्षा विभाग शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। इसमें नौकरी से बर्खास्तगी, पुरस्कार वापसी और वित्तीय वसूली जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
जिला शिक्षा अधिकारी, पौड़ी द्वारा इस पूरे मामले की रिपोर्ट प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी को भेज दी गई है। विभाग के अनुसार, सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यह मामला न सिर्फ नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दशकों तक ऐसी अनियमितताएं कैसे अनदेखी रह सकती हैं।



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