उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों के बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। वन विभाग की विभागीय जांच में आदमखोर होने के आरोप में पकड़े गए 14 में से 12 तेंदुए बेगुनाह साबित हुए हैं। जांच रिपोर्ट के बाद इन सभी तेंदुओं को पिंजरों से मुक्त कर वापस जंगल में छोड़ दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के बाद वन विभाग ने ट्रैप कैमरों और पिंजरों की मदद से संदिग्ध तेंदुओं को पकड़कर अल्मोड़ा स्थित एनटीडी रेस्क्यू सेंटर में रखा था। इन सभी तेंदुओं के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे।
लैब रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हुआ कि इनमें से 12 तेंदुए आदमखोर नहीं हैं। इसके बाद विभाग ने उन्हें दोषमुक्त घोषित करते हुए जंगल में छोड़ दिया। हालांकि, दो तेंदुओं की जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जिनके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर असली आदमखोर तेंदुए कहां हैं? पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में तेंदुओं और बाघों द्वारा सैकड़ों लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
रेस्क्यू सेंटर के अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक साल में कुल 14 गुलदार पकड़े गए थे। जांच के बाद 12 को निर्दोष पाए जाने पर रिहा कर दिया गया है, जबकि दो अभी भी निगरानी में हैं।
महीनों तक कैद में रहे निर्दोष
जिन 12 तेंदुओं को रिहा किया गया, उन्होंने महीनों तक पिंजरों में कैद रहकर “सजा” झेली, जबकि वे निर्दोष थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
घायल मादा गुलदार का रेस्क्यू
इसी बीच बागेश्वर जिले में एक घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू किया गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाकर उसे सुरक्षित कब्जे में लिया।
रेस्क्यू के बाद उसे उपचार के लिए केंद्र भेजा गया है, जहां स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा।



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