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post authorAdmin 20 Apr 2026

उत्तराखंड में मदरसों पर सख्त रुख: राज्य बोर्ड का पाठ्यक्रम अनिवार्य, नियम न मानने पर कार्रवाई.

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को एकरूप और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब प्रदेश के सभी मदरसों में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जुलाई महीने से यह व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में लंबे समय से संचालित मदरसा बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद अब सभी मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत लाया जाएगा।

सरकार के इस फैसले के तहत, जिन मदरसों में राज्य बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बंद करने तक की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।

यह घोषणा रविवार को एक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान की गई, जहां मुख्यमंत्री ने अन्य विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में अक्षय तृतीया के अवसर पर चारधाम यात्रा के शुभारंभ की जानकारी भी दी गई।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर मिल सकेंगे। हालांकि, इस फैसले को लेकर विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक वर्गों में चर्चा भी तेज हो गई है।