गैरसैंण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भ्रष्टाचार का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने सरकार की ओर से स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब आईएएस और आईएफएस जैसे वरिष्ठ अधिकारियों तक को भ्रष्टाचार के मामलों में निलंबित किया गया है। सरकार ने जहां भी शिकायत मिली, वहां कार्रवाई करने का दावा किया है।
विजिलेंस की कार्रवाई
संसदीय कार्यमंत्री के अनुसार पिछले चार वर्षों में विजिलेंस विभाग ने 92 मामलों में कार्रवाई करते हुए 108 लोगों को ट्रैप किया है। साथ ही भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए जारी टोल-फ्री नंबर पर प्राप्त लगभग 90 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए कड़ा नकलरोधी कानून लागू किया है और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड से जुड़े मामलों में दोषी अधिकारियों को जेल भेजा गया है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनी सुशासन का मॉडल
सुबोध उनियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सुशासन का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। इसके जरिए आम जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 10 करोड़ रुपये तक के ठेके स्थानीय ठेकेदारों को देने का निर्णय लिया है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
साथ ही विकास प्राधिकरणों में ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति व्यवस्था लागू की गई है।
खनन क्षेत्र में पारदर्शिता का दावा करते हुए मंत्री ने कहा कि खनन से मिलने वाला राजस्व 300 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, और अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाई गई है।
डाकपत्थर भूमि को लेकर सरकार का स्पष्टीकरण
देहरादून के डाकपत्थर क्षेत्र की भूमि को लेकर उठे सवालों पर मंत्री ने कहा कि भूमि को बेचा नहीं गया है, बल्कि मास्टर प्लान तैयार करने के लिए विभागों के बीच हस्तांतरित किया गया है।
यूआईआईडीबी द्वारा इस क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में देरी के कारण पूर्व में चयनित एजेंसी को बदल दिया गया है और उससे करीब 19 करोड़ रुपये की वसूली की कार्रवाई की जा रही है।
देहरादून में इलेक्ट्रिक बस सेवा से अब तक 76 लाख से अधिक यात्री लाभान्वित हो चुके हैं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों से जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि 2022 से अब तक 29 अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति शासन में लंबित है।
उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक हरीश धामी ने भी सरकार पर भ्रष्टाचार रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया।
सदन में नोक-झोंक
सत्र के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा के बीच भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह के बीच तीखी नोक-झोंक भी देखने को मिली।
मामला व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया, जिसके बाद पीठ ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों विधायकों को संयम बरतने की हिदायत दी और उक्त टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।




Admin






