दिल्ली - हिंदूस्तान के दुश्मनों की नींद उड़ाने के लिए देश की समुद्र सीमा को अभेद्य और अखंड रखने वाला अबतक की सबसे आधुनिक सबमरीन्स में से एक INS वागशीर भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में जल्द शामिल होने वाला है। प्रोजेक्ट 75 के तहत बनाई गई यह सबमरीन कलवरी श्रेणी की आखरी सबमरीन है। यह कलवरी क्लास की डिजल इलेक्ट्रिक सबमरीन है। इस सबमरीन की लंबाई करीब 221 फिट है और ये करीब 40 फिट उंची है। इस सबमरीन में 360 बैटरी सेल्स लगे हैं। मुंबई के मंझगांव डॉक पर बनी इस सबमरीन का 40 फिसदी से ज्यादा हिस्सा आत्मनिर्भर भारत के तहत बनाया गया है। पानी की सतह पर ये पनडुब्बी करीब 20 KM प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है जबकि पानी के भीतर इस सायलेंट किलर की रफ्तार करीब 37 KM प्रति घंटे होती है। ये पनडुब्बी समुद्र तह में 350 फीट तक की गहराई में जाकर दुश्मन का पता लगा सकती है। दुश्मनों को खाक करने के लिए इस सबमरीन में घातक हथियार लगे हुए हैं। अपने एडवांस सिस्टम की वजह से ये किलर सबमरीन बिना आवाज किए समुद्र में चलती है। स्टील्थ टेक्नोलॉजी की वजह से ये दुश्मनों के रडार की पकड़ में नहीं आती है। हर प्रकार के मिशन को अंजाम देने में INS वागशीर को महारत हासिल है। इस पनडुब्बी में एक वक्त में 6 अधिकारी और 35 सेलर तैनात किए जा सकते हैं। इस पनडुब्बी के जंगी बेड़े में शामिल होने से समुद्र सीमा की सुरक्षा और मजबूत होगी।



abhishek






